बारिश या तेज हवा के बाद खेत में बड़ी संख्या में पौधे झुककर जमीन पर गिर जाएं, तो इसे खड़ी फसल गिरना (Lodging) कहते हैं। इसमें पौधे का तना मुड़ या टूट सकता है, या पौधा जड़ों के पास से उखड़ सकता है।
तेज हवा, भारी बारिश और जलभराव इसके बड़े कारण हो सकते हैं। इसके अलावा जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन, बहुत घनी बुवाई, कमजोर जड़ें और कुछ रोग-कीट भी फसल के गिरने का खतरा बढ़ा सकते हैं।
सबसे पहले यह पता लगाना जरूरी है कि पौधे तने से गिरे हैं या जड़ों से उखड़े हैं। इसी आधार पर आगे का फैसला करना आसान होगा।
खेत में फसल गिरने की पहचान कैसे करें?
खेत में इन बातों पर ध्यान दें:
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बड़ी संख्या में पौधे एक ही दिशा में झुके या गिरे दिखाई दें।
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पौधे जड़ों के साथ मिट्टी से उखड़े हुए हों, तो यह जड़ से गिरने का संकेत है।
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तना बीच में या नीचे की गांठों के पास मुड़ा या टूटा हो, तो यह तने से गिरने की समस्या हो सकती है।
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तने के निचले हिस्से में नरमी, छेद या कीट का लार्वा दिखाई दे।
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जड़ों के आसपास मिट्टी बहुत गीली हो और जड़ें सड़ी या कमजोर दिखाई दें।
फसल गिरने के मुख्य कारण
1. तेज हवा और भारी बारिश
तेज हवा पौधों को एक दिशा में झुका सकती है। लगातार बारिश के कारण मिट्टी नरम होने पर पौधों की जड़ें भी कमजोर होकर उखड़ सकती हैं।
2. जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन
नाइट्रोजन की बहुत अधिक मात्रा से पौधे तेजी से बढ़ सकते हैं और कई बार तने अपेक्षाकृत कमजोर रह जाते हैं। इसलिए खाद की मात्रा और समय फसल तथा मिट्टी की जरूरत के अनुसार रखना जरूरी है। ICAR की धान संबंधी सलाह में भी नाइट्रोजन को एक साथ देने के बजाय कई हिस्सों में देने की सिफारिश की गई है।
3. बहुत घनी बुवाई
बहुत ज्यादा पौधे होने पर पौधे रोशनी के लिए ऊपर की ओर तेजी से बढ़ सकते हैं। इससे पौधे लंबे और कमजोर हो सकते हैं और गिरने का खतरा बढ़ सकता है।
4. जलभराव और कमजोर जड़ें
खेत में पानी लंबे समय तक जमा रहने से मिट्टी नरम हो सकती है और जड़ों का सहारा कमजोर पड़ सकता है।
5. रोग और कीट
कुछ कीट और रोग तने या पौधे के निचले हिस्से को कमजोर कर सकते हैं। इसलिए केवल देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि फसल हवा या बारिश के कारण ही गिरी है।
खेत में तुरंत कैसे जांच करें?
बारिश या तेज हवा के बाद खेत के अलग-अलग हिस्सों से कुछ पौधों की जांच करें।
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खेत के किनारे और बीच दोनों जगह देखें।
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कुछ गिरे हुए पौधों को सावधानी से उखाड़ें।
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देखें कि जड़ें मजबूत हैं या सड़ी और नरम हैं।
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तने के निचले 2–3 हिस्सों को देखें।
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तने में छेद, सुरंग या कीट का लार्वा दिखाई दे तो उसे नोट करें।
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देखें कि पूरी फसल गिरी है या केवल कुछ हिस्से प्रभावित हैं।
अगर केवल खेत के किनारे की फसल गिरी है, तो तेज हवा का असर हो सकता है। अगर बड़े हिस्से में पौधे एक दिशा में गिरे हैं, तो मौसम का असर अधिक संभावित हो सकता है।
अभी क्या करें?
अगर कटाई नजदीक है
कटाई का समय पास है और फसल काफी गिर गई है, तो जल्दी कटाई पर विचार करें। जमीन के संपर्क में पड़े अनाज में नमी, सड़न, पक्षियों और चूहों से नुकसान बढ़ सकता है।
लेकिन केवल फसल गिरने के आधार पर तुरंत कटाई का फैसला न लें। फसल की अवस्था और स्थानीय कृषि विभाग या कृषि विश्वविद्यालय की सलाह भी देखें।
अगर खेत में पानी भरा है
जहां संभव हो, खेत से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करें। लंबे समय तक जलभराव रहने से जड़ों की स्थिति और खराब हो सकती है।
अगर कीट या रोग का संदेह है
तने के अंदर छेद, लार्वा, सड़न या असामान्य नरमी मिले तो पहले कारण की पहचान करें। बिना कारण जाने कोई कीटनाशक या रोग की दवा न डालें।
इन गलतियों से बचें
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फसल गिरते ही दोबारा जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन न डालें।
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बिना सलाह के किसी ग्रोथ रेगुलेटर (PGR) का इस्तेमाल न करें।
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केवल पत्तियों का रंग देखकर खाद की कमी का फैसला न करें।
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केवल एक-दो पौधों को देखकर पूरे खेत का कारण तय न करें।
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कटाई या दवा के बारे में दूसरे राज्य की सलाह को अपने खेत पर सीधे लागू न करें।
अगले मौसम में फसल गिरने का खतरा कैसे घटाएं?
संतुलित खाद दें
नाइट्रोजन की मात्रा मिट्टी की जांच और स्थानीय सिफारिश के अनुसार रखें। जरूरत के अनुसार नाइट्रोजन को कई बार में देना बेहतर हो सकता है। ICAR के शोध में धान में नाइट्रोजन प्रबंधन और पोटेशियम के उपयोग से फसल गिरने की समस्या कम होने के संकेत मिले हैं।
बहुत घनी बुवाई से बचें
उचित बीज दर और पौधों के बीच सही दूरी रखें। ICAR के एक प्रदर्शन में बेहतर पौध संख्या और जड़ों की मजबूत पकड़ से धान में गिरने से होने वाला नुकसान कम पाया गया।
खेत में पानी की निकासी रखें
खेत की मेड़ और पानी निकलने की व्यवस्था ठीक रखें, ताकि भारी बारिश के बाद पानी लंबे समय तक जमा न रहे।
मजबूत किस्म चुनें
जहां फसल गिरने की समस्या बार-बार होती है, वहां ऐसी किस्म चुनना उपयोगी हो सकता है जिसमें तना मजबूत हो और गिरने की क्षमता कम हो। किस्म का चुनाव अपने क्षेत्र के लिए कृषि विश्वविद्यालय, KVK या कृषि विभाग की सिफारिश के आधार पर करें। ICAR द्वारा विकसित कुछ धान किस्मों में मजबूत तने और गिरने से बेहतर बचाव को महत्वपूर्ण गुण बताया गया है।
पोटेशियम की जरूरत जांचें
पोटेशियम फसल की मजबूती में भूमिका निभा सकता है, लेकिन इसे बिना जरूरत के अधिक मात्रा में डालना सही नहीं है। मिट्टी की जांच और स्थानीय सिफारिश के अनुसार ही खाद दें।
फसल गिरने से कितना नुकसान हो सकता है?
नुकसान का कोई एक निश्चित प्रतिशत नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कितनी फसल गिरी है, फसल किस अवस्था में है, अनाज कितना पक चुका है और खेत में नमी कितनी है।
कुछ परिस्थितियों में नुकसान काफी अधिक हो सकता है। उदाहरण के लिए, ICAR के एक धान प्रदर्शन में पारंपरिक बिखरी बुवाई वाली फसल में गिरने के कारण लगभग 20% फसल नुकसान दर्ज किया गया था।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या तना टूटना हमेशा कीट या रोग के कारण होता है?
नहीं। तेज हवा और बारिश भी तने को मोड़ या तोड़ सकती है। अगर तने के अंदर छेद या लार्वा मिले, तो कीट का संदेह बढ़ जाता है।
अगर आधी फसल गिर गई है तो क्या करें?
पहले देखें कि पौधे तने से गिरे हैं या जड़ों से उखड़े हैं। अगर फसल पकने के करीब है, तो स्थानीय सलाह के अनुसार जल्दी कटाई पर विचार किया जा सकता है।
क्या गिरी हुई फसल में दोबारा नाइट्रोजन डालना चाहिए?
सिर्फ फसल गिरने के कारण नाइट्रोजन न डालें। पहले यह पता करें कि फसल क्यों गिरी और खाद की वास्तव में जरूरत है या नहीं।
क्या PGR डालकर फसल को गिरने से बचाया जा सकता है?
PGR का असर फसल, किस्म, मौसम और सही समय पर निर्भर करता है। इसलिए बिना स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के इसका प्रयोग न करें।
क्या घनी बुवाई से फसल गिरने का खतरा बढ़ता है?
हां, बहुत अधिक घनत्व में पौधे लंबे और कमजोर हो सकते हैं। अगली फसल में क्षेत्र और फसल के अनुसार सही बीज दर और दूरी रखना बेहतर है।
Kishanix सलाह
बारिश या तेज हवा के बाद सबसे पहले यह देखें कि पौधे तने से गिरे हैं या जड़ों से उखड़े हैं। कुछ पौधों को उखाड़कर जड़, तने के निचले हिस्से और कीट या रोग के लक्षण जरूर जांचें।
अगर फसल पकने के करीब है, तो कटाई में अनावश्यक देरी न करें। खाद, PGR या कीटनाशक का इस्तेमाल केवल समस्या का कारण पहचानने के बाद और स्थानीय कृषि विभाग, KVK या कृषि विश्वविद्यालय की सलाह के अनुसार करें।




