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धान की पराली: खेत का कचरा नहीं, किसान की अतिरिक्त कमाई का जरिया

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धान की पराली: खेत का कचरा नहीं, किसान की अतिरिक्त कमाई का जरिया

धान की कटाई के बाद खेत में बचने वाला तना और पत्तियों का सूखा अवशेष धान की पराली (Paddy Straw) कहलाता है। आमतौर पर किसान इसे जल्दी हटाने के लिए जला देते हैं, लेकिन यही पराली पशु आहार, कम्पोस्ट, मशरूम, बायोमास ईंधन और औद्योगिक उपयोग के जरिए आय का स्रोत बन सकती है। सरकार भी इसके संग्रह, प्रबंधन और उपयोग के लिए सहायता दे रही है।

धान की पराली क्यों महत्वपूर्ण है?

पराली में कार्बनिक पदार्थ और कार्बन की पर्याप्त मात्रा होती है। इसे खेत में मिलाने पर जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिल सकती है। ICAR के अनुसार, पराली को छोटे टुकड़ों में काटकर उचित नमी और जैविक सामग्री के साथ कम्पोस्ट बनाया जा सकता है। ICAR का Pusa Decomposer भी धान की पराली के तेजी से अपघटन के लिए विकसित किया गया है।

पराली का उपयोग कैसे करें?

किसान पराली को कई तरीकों से उपयोग कर सकता है:

  • कम्पोस्ट और जैविक खाद बनाना
  • मशरूम उत्पादन में उपयोग
  • बेल बनाकर (Baling) पशु आहार/बेडिंग के रूप में उपयोग, जहां उपयुक्त हो
  • बायोमास पेलेट और ब्रिकेट बनाना
  • बायोएनर्जी और औद्योगिक ईंधन के लिए कच्चा माल
  • 2G Ethanol, CBG और अन्य Bioenergy applications में feedstock के रूप में उपयोग

ICAR के एक हालिया प्रकाशन में पaddy straw के बेहतर उपयोग, value addition और mushroom cultivation से अतिरिक्त farm income के उदाहरण भी दिए गए हैं।

किसान कितनी कमाई कर सकता है?

पराली की कीमत क्षेत्र, नमी, गुणवत्ता, बेलिंग की लागत, दूरी और खरीदार के अनुसार काफी बदलती है। इसलिए कोई एक निश्चित राष्ट्रीय बाजार भाव नहीं है।

उदाहरण के तौर पर, जून 2026 में एक निजी biomass-market source ने paddy-straw pellets के लिए लगभग ₹6,000–₹9,000 प्रति टन का indicative bulk price बताया है। यह pellet का भाव है, कच्ची पराली का नहीं और इसे केवल बाजार संकेत समझना चाहिए।

व्यावहारिक रूप से छोटे किसान के लिए सीधे processing plant लगाने के बजाय पराली को इकट्ठा करके bale बनाकर aggregator, biomass buyer या उद्योग को बेचने का मॉडल अधिक आसान हो सकता है।

सरकार से मिलने वाली सहायता

धान की पराली के प्रबंधन के लिए केंद्र की Crop Residue Management (CRM) Scheme के तहत पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में किसानों को crop-residue-management मशीनों की खरीद पर 50% वित्तीय सहायता दी जाती है। Custom Hiring Centres स्थापित करने वाले पात्र समूहों/संस्थाओं के लिए सहायता 80% तक है। Paddy-straw supply-chain projects के लिए capital machinery cost पर 65% तक, अधिकतम ₹1.50 करोड़ की वित्तीय सहायता का प्रावधान है।

इसके अलावा, biomass pellet/briquette और waste-to-energy क्षेत्र में केंद्र की योजनाएं रही हैं। लेकिन यहां ध्यान देना जरूरी है कि हर योजना में आवेदन की तारीख और बजट उपलब्धता अलग होती है; इसलिए आवेदन से पहले संबंधित सरकारी पोर्टल और राज्य कृषि विभाग से वर्तमान स्थिति जांचनी चाहिए।

बाजार कहां मिलेगा?

पराली बेचने से पहले किसान को आसपास के biomass plants, pellet/briquette manufacturers, dairy/fodder buyers, CBG/bioenergy projects और कृषिआधारित उद्योगों से संपर्क करना चाहिए। FPO या गांव के किसानों का समूह बनाकर बड़ी मात्रा में bale supply करने पर खरीदार से बेहतर सौदे की संभावना हो सकती है।

छोटा Business Model

मान लीजिए किसी किसान समूह के पास 100 टन सूखी पराली है। वे उसे इकट्ठा करके bale बनाते हैं और biomass buyer को बेचते हैं। कुल आय निकालते समय केवल बिक्री मूल्य नहीं, बल्कि baling, मजदूरी, परिवहन, भंडारण और processing का खर्च घटाना जरूरी है। इसलिए वास्तविक लाभ स्थानीय buyer के quotation और logistics पर निर्भर करेगा।

सावधानियां

पराली को बेचने या process करने से पहले उसकी नमी, गुणवत्ता, contamination, storage और transportation cost जांचें। सबसे महत्वपूर्ण बात—बिना खरीदार तय किए बड़ी मात्रा में पराली इकट्ठा करके न रखें।

निष्कर्ष

धान की पराली कचरा नहीं, बल्कि किसान के लिए संभावित आय का स्रोत है। सही collection, baling और market linkage के जरिए किसान इसे जलाने के बजाय मूल्यवान biomass में बदल सकता है।