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हैदराबाद में दक्षिण क्षेत्र कृषि सम्मेलन: टिकाऊ खेती, डिजिटल कृषि और किसानों की आय बढ़ाने पर चर्चा

सरकारी अपडेट

हैदराबाद, 18 सितंबर 2026: देश में खेती को अधिक टिकाऊ, आधुनिक और बदलते मौसम के प्रति मजबूत बनाने के उद्देश्य से हैदराबाद में दक्षिण क्षेत्र कृषि सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में केंद्र सरकार, दक्षिणी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ कृषि विशेषज्ञ, ICAR संस्थानों के वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारक शामिल हो रहे हैं।

सम्मेलन में खेती से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जा रही है। इनमें डिजिटल कृषि और किसान रजिस्ट्री, उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देना, कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन, खाद्य तेल और दलहन में आत्मनिर्भरता, प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणाली और संतुलित उर्वरक प्रबंधन प्रमुख हैं।

किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा नकली और घटिया कृषि इनपुट की समस्या भी है। सम्मेलन में नकली कीटनाशकों और उर्वरकों की बिक्री को रोकने के उपायों पर भी विचार किया जा रहा है। इससे कृषि इनपुट की गुणवत्ता और किसानों तक सही उत्पाद पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया जा सकता है।

राज्यों के सफल कृषि मॉडल पर भी चर्चा

इस सम्मेलन में दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों की कृषि क्षेत्र में अपनाई जा रही योजनाओं और सफल प्रयोगों को भी साझा किया जाएगा। तेलंगाना की Rythunestham पहल, आंध्र प्रदेश में मौसम की अनिश्चितता से निपटने के प्रयास, कर्नाटक में दलहन उत्पादन को बेहतर बनाने की तकनीक, केरल में कृषि उपज की खरीद और बाजार से जुड़ी पहल तथा तमिलनाडु में प्रिसिजन फार्मिंग और हाईटेक कृषि जैसे उदाहरण चर्चा का हिस्सा हैं।

इन अनुभवों को दूसरे राज्यों में भी अपनाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि किसी राज्य में सफल रही कृषि तकनीक या व्यवस्था को जरूरत के अनुसार दूसरे क्षेत्रों में भी लागू किया जा सके।

डिजिटल कृषि और किसान रजिस्ट्री पर जोर

सम्मेलन में डिजिटल कृषि और किसान रजिस्ट्री को भी प्रमुख विषय बनाया गया है। डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से किसानों से संबंधित जानकारी को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने, कृषि सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने और योजनाओं तथा कृषि संबंधी जानकारी को अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की दिशा में काम किया जा सकता है।

इसके साथ ही उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों, कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि खेती के बाद उत्पाद की गुणवत्ता, प्रसंस्करण, भंडारण और बाजार तक पहुंच को भी मजबूत करना है।

किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन?

इस सम्मेलन का सीधा उद्देश्य दक्षिणी राज्यों में कृषि क्षेत्र से जुड़ी प्राथमिकताओं पर समन्वय बढ़ाना है, लेकिन इसमें चर्चा किए जा रहे कई विषय देश के अन्य किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। मौसम के अनुरूप खेती, प्राकृतिक और एकीकृत कृषि, संतुलित उर्वरक उपयोग, डिजिटल कृषि, बेहतर बाजार, भंडारण, प्रसंस्करण और कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन आज किसानों की आय और खेती की लागत से जुड़े महत्वपूर्ण विषय हैं।

सरकार के अनुसार सम्मेलन के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, सफल कृषि पहलों के आदान-प्रदान और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए केंद्रित रणनीतियों को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।

Kishanix की नजर में, इस तरह के कृषि सम्मेलन में होने वाली चर्चाओं का महत्व इसलिए है क्योंकि खेती अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। मौसम, तकनीक, बाजार, भंडारण, प्रसंस्करण और सही कृषि इनपुट—इन सभी को साथ लेकर आगे बढ़ना किसानों के लिए महत्वपूर्ण होता जा रहा है।