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घर बैठे होगी खाद की बुकिंग, लाइन और धक्कामुक्की से मिलेगी राहत

सरकारी अपडेट

खरीफ और रबी सीजन में किसानों के लिए खाद की उपलब्धता एक बड़ी चिंता रहती है। कई बार किसानों को उर्वरक खरीदने के लिए घंटों दुकानों के बाहर कतार में खड़ा रहना पड़ता है। इसके अलावा निर्धारित कीमत से अधिक दाम वसूलने, खाद की कमी, कालाबाजारी और जमाखोरी जैसी शिकायतें भी सामने आती रही हैं। अब डिजिटल व्यवस्था के जरिए इन समस्याओं को कम करने की कोशिश की जा रही है।

कृषि विभाग ने फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल एप्लिकेशन सिस्टम (FSAS) लागू किया है। इस व्यवस्था के तहत किसानों को मोबाइल एप के माध्यम से घर बैठे उर्वरक की ऑनलाइन बुकिंग करने की सुविधा मिलेगी। बुकिंग के बाद किसान को एक क्यूआर कोड या ई-टोकन जारी किया जाएगा। इसके आधार पर किसान अधिकृत विक्रेता से अपनी बुक की गई खाद प्राप्त कर सकेंगे।

कैसे काम करेगी यह व्यवस्था?

नई व्यवस्था के तहत किसान को सबसे पहले अपने मोबाइल में FSAS एप डाउनलोड करना होगा। इसके बाद एप पर उपलब्ध प्रक्रिया के अनुसार अपनी जरूरत के मुताबिक उर्वरक की बुकिंग करनी होगी। किसान अपनी सुविधा के अनुसार किसी अधिकृत विक्रेता का चयन भी कर सकेंगे।

बुकिंग सफल होने के बाद किसान को एक यूनिक क्यूआर कोड या ई-टोकन मिलेगा। खाद लेने के समय किसान को संबंधित अधिकृत दुकान पर यह कोड दिखाना होगा। सत्यापन के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।

यदि किसी किसान के लिए स्वयं दुकान तक पहुंचना संभव नहीं है, तो अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से भी खाद प्राप्त करने की सुविधा दी जा सकती है। इसके लिए निर्धारित पहचान और बुकिंग संबंधी जानकारी की जरूरत होगी। इससे बुजुर्ग किसानों तथा दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले किसानों को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।

किसानों को क्या फायदा होगा?

इस डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा समय और श्रम की बचत हो सकता है। किसानों को खाद मिलने की उम्मीद में बार-बार अलग-अलग दुकानों के चक्कर लगाने और लंबी कतार में खड़े रहने की परेशानी कम हो सकती है।

डिजिटल रिकॉर्ड बनने से यह जानकारी भी दर्ज रहेगी कि किस किसान ने कितनी मात्रा में उर्वरक खरीदा, किस विक्रेता से खरीदा और कब खरीदा। इससे उर्वरक वितरण में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जी खरीद-बिक्री, बिचौलियों तथा कालाबाजारी पर नियंत्रण करने में मदद मिल सकती है।

विक्रेताओं के लिए भी यह व्यवस्था स्टॉक प्रबंधन को बेहतर बनाने में सहायक हो सकती है। प्रशासन को उर्वरक की उपलब्धता और वितरण पर निगरानी रखने में आसानी होगी।

हालांकि, किसी भी नई डिजिटल व्यवस्था की तरह इसमें भी शुरुआत में तकनीकी समस्याएं सामने आ सकती हैं। अधिकारियों के अनुसार कुछ स्थानों पर तकनीकी दिक्कतों के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। इसलिए किसानों के लिए जरूरी है कि वे बुकिंग प्रक्रिया, अधिकृत विक्रेता और उर्वरक की निर्धारित कीमत से संबंधित जानकारी आधिकारिक माध्यम से ही प्राप्त करें।

Kishanix की नजर में, ऐसी डिजिटल व्यवस्था तभी पूरी तरह सफल होगी जब इसका इस्तेमाल गांवों तक आसान तरीके से पहुंचे और जिन किसानों के पास स्मार्टफोन या डिजिटल सुविधा नहीं है, उनके लिए भी सहायता की व्यवस्था उपलब्ध हो।