उत्तर प्रदेश में किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ-साथ ऐसी फसलों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिनसे कम क्षेत्र में बेहतर आय की संभावना बन सकती है। इसी दिशा में राज्य सरकार स्ट्रॉबेरी की खेती को बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना के तहत प्रदेश के 39 जिलों में स्ट्रॉबेरी उत्पादन को प्रोत्साहित करने की योजना है। इसके तहत पात्र किसानों को स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर ₹80,000 तक का अनुदान दिया जा सकता है।
स्ट्रॉबेरी की खेती क्यों हो सकती है फायदेमंद?
स्ट्रॉबेरी एक उच्च मूल्य वाली बागवानी फसल मानी जाती है। इसकी मांग ताजा फल के अलावा जूस, जैम, आइसक्रीम, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों में भी रहती है। सही किस्म, अच्छी गुणवत्ता के पौध, उपयुक्त मिट्टी, सिंचाई और बाजार की व्यवस्था के साथ किसान इस फसल को अतिरिक्त आय के विकल्प के रूप में अपना सकते हैं।
हालांकि, स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू करने से पहले किसान को स्थानीय जलवायु, मिट्टी, पानी की उपलब्धता, उत्पादन लागत और बाजार की मांग की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। केवल सब्सिडी मिलने के आधार पर खेती शुरू करना उचित नहीं होगा।
पूर्वांचल के छह जिलों में 35 हेक्टेयर का लक्ष्य
योजना के तहत पूर्वांचल के छह जिलों में कुल 35 हेक्टेयर क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती कराने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कुल ₹28 लाख के अनुदान का प्रावधान बताया गया है।
जिलेवार लक्ष्य इस प्रकार है:
| जिला | खेती का लक्ष्य | संभावित अनुदान |
| सोनभद्र | 8 हेक्टेयर | ₹6.40 लाख |
| चंदौली | 6 हेक्टेयर | ₹4.80 लाख |
| भदोही | 6 हेक्टेयर | ₹4.80 लाख |
| मीरजापुर | 6 हेक्टेयर | ₹4.80 लाख |
| वाराणसी | 5 हेक्टेयर | ₹4.00 लाख |
| जौनपुर | 4 हेक्टेयर | ₹3.20 लाख |
| कुल | 35 हेक्टेयर | ₹28 लाख |
इन आंकड़ों के अनुसार सोनभद्र में सबसे अधिक 8 हेक्टेयर क्षेत्र को स्ट्रॉबेरी की खेती से जोड़ने का लक्ष्य है। इसके बाद चंदौली, भदोही और मीरजापुर में 6-6 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है।
पहले आवेदन करने वालों को मिल सकता है लाभ
इस योजना में किसानों का चयन प्रथम आवक-प्रथम पावक (First Come, First Served) के आधार पर किए जाने की जानकारी दी गई है। इसका अर्थ है कि निर्धारित पात्रता और अन्य शर्तें पूरी करने वाले किसानों में आवेदन के क्रम को महत्व दिया जा सकता है।
इसलिए स्ट्रॉबेरी की खेती में रुचि रखने वाले किसानों को अपने जिले में योजना की स्थिति और उपलब्ध लक्ष्य की जानकारी समय रहते लेनी चाहिए।
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
किसान आवेदन करने से पहले अपने जिले के उद्यान विभाग से यह जरूर पता करें कि:
- उनके जिले में स्ट्रॉबेरी की खेती का लक्ष्य उपलब्ध है या नहीं।
- योजना के लिए किसान की पात्रता क्या निर्धारित है।
- कितने क्षेत्र में खेती करने पर अनुदान मिलेगा।
- आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज आवश्यक हैं।
- पौध, खेती और अन्य सामग्री के संबंध में विभाग के क्या मानक हैं।
- अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया और समयसीमा क्या है।
योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित सरकारी प्रक्रिया के अनुसार ऑनलाइन आवेदन/पंजीकरण करना होगा। किसानों को आवेदन में सही जानकारी देना और आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराना चाहिए।
सब्सिडी के साथ बाजार की योजना भी जरूरी
स्ट्रॉबेरी की खेती में उत्पादन के साथ-साथ बिक्री और बाजार की योजना भी महत्वपूर्ण है। फल जल्दी खराब होने वाली उपज है, इसलिए किसान को खेती शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार, थोक खरीदार, फल विक्रेता, प्रसंस्करण इकाइयों और सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच जैसे विकल्पों पर विचार करना चाहिए।
किसान यह भी पता कर सकते हैं कि उनके आसपास स्ट्रॉबेरी की मांग किस मौसम में अधिक रहती है और परिवहन एवं पैकिंग की लागत कितनी होगी।
Kishanix की सलाह
Kishanix का मानना है कि किसानों के लिए किसी भी नई फसल की जानकारी केवल सब्सिडी तक सीमित नहीं होनी चाहिए। किसान को फसल की लागत, खेती की तकनीक, मौसम, बाजार, संभावित बिक्री मूल्य और जोखिम-इन सभी पहलुओं की जानकारी लेकर निर्णय लेना चाहिए।
स्ट्रॉबेरी की खेती में रुचि रखने वाले किसान अपने जिले के उद्यान विभाग या संबंधित कृषि अधिकारी से योजना की वर्तमान स्थिति और पात्रता की पुष्टि जरूर करें। सरकारी योजनाओं के नियम और जिलेवार लक्ष्य समय के साथ बदल सकते हैं, इसलिए आवेदन करने से पहले आधिकारिक जानकारी देखना सबसे सुरक्षित तरीका है।
Kishanix किसानों तक खेती, सरकारी योजनाओं, बाजार और कृषि से जुड़ी उपयोगी एवं सरल जानकारी पहुंचाने का प्रयास करता है, ताकि किसान सही जानकारी के आधार पर बेहतर निर्णय ले सकें।
