
नई दिल्ली। भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 2026 कमजोर और असमान रहने के संकेत दे रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 2 सितंबर तक देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश की गतिविधि में बड़ा अंतर रह सकता है। कुछ क्षेत्रों में बारिश जारी रहने की संभावना है, जबकि कई इलाकों में लंबे शुष्क दौर किसानों की चिंता बढ़ा सकते हैं।
मौसम विशेषज्ञों की नजर इस समय El Niño, Indian Ocean Dipole (IOD) और मॉनसून ट्रफ की स्थिति पर है। El Niño का मजबूत होना आमतौर पर भारतीय मॉनसून के लिए चुनौती माना जाता है। वहीं IOD और समुद्री तापमान में बदलाव बारिश के वितरण को प्रभावित कर सकते हैं। मॉनसून ट्रफ की स्थिति भी यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि उत्तर और मध्य भारत में बारिश की गतिविधि कितनी सक्रिय रहेगी।
कमजोर मॉनसून का सबसे बड़ा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलों के लिए इस समय मिट्टी में पर्याप्त नमी जरूरी है। बारिश के बीच लंबा अंतर आने पर फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और सिंचाई की जरूरत बढ़ सकती है। दूसरी ओर, कम समय में बहुत अधिक बारिश होने पर जलभराव और फसल नुकसान का खतरा भी रहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को केवल कुल बारिश के आंकड़े पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। बारिश कब हुई, कितनी हुई और कितने अंतराल के बाद हुई, यह भी खेती के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। एक सप्ताह में अधिक बारिश और उसके बाद लंबे समय तक सूखा रहने से कुल बारिश सामान्य दिख सकती है, लेकिन खेत में नमी की कमी हो सकती है।
आने वाले दिनों में सितंबर की बारिश पर खास नजर रहेगी। सितंबर खरीफ फसलों की अंतिम बढ़वार और दाना बनने के लिहाज से महत्वपूर्ण महीना है। यदि बारिश कमजोर रहती है तो उत्पादन और खेती की लागत दोनों पर असर पड़ सकता है।
किसानों को सलाह है कि वे अपने जिले का 3 से 5 दिन का मौसम पूर्वानुमान और कृषि मौसम सलाह नियमित रूप से देखें। बारिश की संभावना होने पर अनावश्यक सिंचाई से बचें और भारी बारिश की चेतावनी होने पर खेतों में जल निकासी की व्यवस्था रखें। कीट और रोग की निगरानी भी लगातार करते रहें।
फिलहाल मॉनसून पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में परिस्थितियां बदल सकती हैं। इसलिए किसानों के लिए सबसे जरूरी है कि वे घबराने के बजाय स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के आधार पर खेती के फैसले लें।
वीडियो में जानिए: वैज्ञानिक और मौसम विशेषज्ञ 2026 के कमजोर मॉनसून, El Niño, IOD और मॉनसून ट्रफ को लेकर क्या संकेत दे रहे हैं और इसका खरीफ फसलों पर कितना असर पड़ सकता है।
किशानिक्स — जागरूक किसान ही सशक्त किसान है।



