लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने और खेती की लागत कम करने के लिए कृषि यंत्रीकरण पर विशेष जोर दे रही है। कृषि विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए संचालित कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर, फार्म मशीनरी बैंक और विभिन्न कृषि यंत्रों की खरीद पर अनुदान देने की व्यवस्था की गई है। इसका सीधा फायदा छोटे, सीमांत और अन्य किसानों को आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराने में हो सकता है।
कृषि विभाग की ओर से जारी सूचना के अनुसार, सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) के तहत प्रत्येक विकासखंड स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के उद्देश्य से 826 कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए किसानों का ई-लॉटरी के माध्यम से चयन किया गया है। प्रत्येक परियोजना की लागत 10 लाख रुपये निर्धारित है। इन केंद्रों में एक ट्रैक्टर के साथ तीन बड़े कृषि यंत्रों की खरीद आवश्यक होगी। परियोजना लागत पर 40 प्रतिशत अनुदान विभाग की ओर से दिया जाएगा।
फार्म मशीनरी बैंक पर 80% तक सहायता
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत फार्म मशीनरी बैंक के लिए निर्धारित 150 के लक्ष्य के सापेक्ष 150 फार्म मशीनरी बैंक ई-लॉटरी के माध्यम से चयनित किए गए हैं। प्रत्येक परियोजना की लागत 10 लाख रुपये है। इसमें एक ट्रैक्टर के साथ तीन बड़े कृषि यंत्र खरीदना आवश्यक है और परियोजना लागत पर 80 प्रतिशत तक राज्य सहायता का प्रावधान है।
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि हर किसान को अलग-अलग महंगे कृषि यंत्र खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसान इन मशीनों को किराये पर लेकर खेती के काम में इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे मशीनरी की लागत किसानों के लिए कम हो सकती है और छोटे किसानों की आधुनिक कृषि यंत्रों तक पहुंच बढ़ सकती है।
6,826 कृषि यंत्रों का लक्ष्य, 6,228 किसानों का चयन
कृषि विभाग ने विभिन्न प्रकार के व्यक्तिगत कृषि यंत्रों के लिए कुल 6,826 यंत्रों का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसके सापेक्ष ई-लॉटरी के माध्यम से 6,228 किसानों का चयन किया गया है। विभागीय सूचना के अनुसार महिला, अनुसूचित जाति/जनजाति तथा अन्य श्रेणी के किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार 40 प्रतिशत राज्य सहायता के रूप में अनुदान दिया जाएगा।
पराली प्रबंधन के लिए भी बड़ा प्रावधान
फसल अवशेष यानी पराली के प्रबंधन को लेकर भी सरकार ने विशेष व्यवस्था की है। विभाग की फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत प्रदेश स्तर पर 218 कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। प्रत्येक परियोजना की लागत 30 लाख रुपये निर्धारित की गई है और इस पर 80 प्रतिशत राज्य सहायता के रूप में अनुदान का प्रावधान है।
इसके अलावा फसल अवशेषों को सीबीजी प्लांट और अन्य व्यावसायिक उपयोगों के लिए सप्लाई करने की व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से प्रदेश स्तर पर 15 एग्रीगेटर का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक परियोजना की लागत 1 करोड़ रुपये निर्धारित है। इस परियोजना में बड़े ट्रैक्टर, ट्रॉली, बेलर, स्ट्रॉ रेक और अन्य अवशेष प्रबंधन मशीनों की व्यवस्था की जाएगी। इस पर 65 प्रतिशत तक राज्य सहायता का प्रावधान है।
किसानों को इन बातों का रखना होगा ध्यान
कृषि विभाग ने मशीन खरीदने वाले चयनित किसानों के लिए कुछ महत्वपूर्ण शर्तें भी निर्धारित की हैं। कृषि यंत्र उन्हीं विक्रेताओं या निर्माताओं से खरीदने होंगे जो कृषि विभाग के यंत्र ट्रेडिंग पोर्टल पर पंजीकृत हों। यंत्र के सीरियल नंबर का बिल और मशीन पर अंकित नंबर से मिलान करना जरूरी होगा।
साथ ही कृषि यंत्र का टेस्टिंग रिपोर्ट केंद्र या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थान से होना आवश्यक है। विभागीय सूचना के अनुसार मशीन खरीद में भुगतान भी निर्धारित नियमों के अनुसार किसान के स्वयं के खाते या परिवार के ब्लड रिलेशन सदस्य के खाते से किया जाना जरूरी है।
चयनित किसानों को व्यक्तिगत कृषि यंत्रों के लिए चयन की तारीख से 30 दिन के भीतर, जबकि परियोजना आधारित यंत्रों के लिए 45 दिन के भीतर संबंधित बिल विभागीय पोर्टल agriculture.up.gov.in पर अपलोड करना होगा।
किसानों के लिए इसका क्या मतलब है?
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार सिर्फ किसान को मशीन खरीदने में मदद नहीं कर रही, बल्कि कृषि मशीनरी को गांव स्तर पर किराये पर उपलब्ध कराने का मॉडल भी विकसित कर रही है। इससे छोटे किसान भी ट्रैक्टर, बुवाई, कटाई और फसल अवशेष प्रबंधन जैसी मशीनों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश में कृषि यंत्रों पर 40 से 80 प्रतिशत तक अनुदान की व्यवस्था को लेकर किसानों के बीच पहले भी व्यापक रुचि देखी गई है। 2026 में कृषि विभाग ने विभिन्न कृषि यंत्रों, कस्टम हायरिंग सेंटर, फार्म मशीनरी बैंक और फसल अवशेष प्रबंधन उपकरणों के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया भी संचालित की थी।
किसानों के लिए संदेश: अगर आपके क्षेत्र में कस्टम हायरिंग सेंटर या फार्म मशीनरी बैंक स्थापित होता है, तो महंगी मशीन खरीदने के बजाय जरूरत के समय किराये पर मशीन लेना आपके लिए अधिक किफायती हो सकता है। वहीं चयनित लाभार्थियों को मशीन खरीदने से पहले कृषि विभाग के पोर्टल पर लागू नियम, पात्र विक्रेता, अनुदान की सीमा और भुगतान संबंधी शर्तों की पुष्टि जरूर करनी चाहिए।




